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इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, FIR में अभद्र भाषा लिखने पर जताई नाराजगी

प्रयागराज। Allahabad High Court ने एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी और गृह सचिव को निर्देश देते हुए कहा है कि पुलिस एफआईआर लिखते समय विशेष सावधानी बरते और उसमें ऐसे शब्दों या गालियों का प्रयोग न किया जाए जो सभ्य समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाते हों।

कोर्ट ने कहा कि एफआईआर एक कानूनी दस्तावेज होती है और उसमें इस्तेमाल की जाने वाली भाषा शालीन एवं मर्यादित होनी चाहिए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध का विवरण दर्ज करना जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर अशोभनीय और आपत्तिजनक शब्दों को सीधे रिकॉर्ड में शामिल करना उचित नहीं माना जा सकता।

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि कई मामलों में एफआईआर में अपमानजनक शब्दों और गालियों को ज्यों का त्यों लिख दिया जाता है, जिससे न केवल दस्तावेज की गरिमा प्रभावित होती है बल्कि समाज पर भी गलत असर पड़ता है।

Allahabad High Court ने निर्देश दिया कि पुलिस अधिकारी भाषा की मर्यादा बनाए रखते हुए घटनाओं का विवरण दर्ज करें। जरूरत पड़ने पर अपमानजनक शब्दों को संकेतात्मक या संयमित तरीके से लिखा जाए।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाई कोर्ट की यह टिप्पणी पुलिस प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। इससे सरकारी दस्तावेजों की भाषा अधिक जिम्मेदार और पेशेवर बन सकेगी। माना जा रहा है कि इस आदेश के बाद प्रदेश पुलिस मुख्यालय की ओर से सभी जिलों को नई गाइडलाइन जारी की जा सकती है।

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