जल निगम भुगतान घोटाले में कई इंजीनियर जांच के घेरे में, करोड़ों के फर्जीवाड़े का मामला

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश जल निगम में करोड़ों रुपये के भुगतान घोटाले की जांच लगातार गहराती जा रही है। विभाग में फर्जीवाड़ा कर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामले में अब कई इंजीनियरों की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। लखनऊ स्थित मुख्यालय से चल रही जांच में अधीक्षण अभियंता और सहायक अभियंता दोनों पदों पर कार्य कर चुके प्रवीण कुमार कुट्टी के अलावा दो अधिशासी अभियंताओं संदीप मौर्या और अजित मौर्या के नाम भी सामने आए हैं।
सूत्रों के अनुसार विभागीय जांच में करोड़ों रुपये के भुगतान में अनियमितताओं और प्रक्रियागत उल्लंघन के संकेत मिले हैं। आरोप है कि कुछ परियोजनाओं और कार्यों में नियमों की अनदेखी करते हुए भुगतान किए गए। जांच एजेंसियां अब संबंधित फाइलों, भुगतान रिकॉर्ड और तकनीकी अनुमोदनों की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।
बताया जा रहा है कि जांच के दौरान कई दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी मिलने के बाद अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। विभागीय मुख्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
जांच का दायरा अब और बढ़ा दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, केवल वरिष्ठ अभियंताओं ही नहीं बल्कि संबंधित अवर अभियंताओं की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि भुगतान प्रक्रिया में किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इसमें निलंबन, विभागीय कार्रवाई और कानूनी मुकदमे तक शामिल हो सकते हैं।
इस घोटाले के सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी विभागों में वित्तीय पारदर्शिता और निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि इस तरह के मामलों पर रोक लगाई जा सके।



